रविवार, 4 फ़रवरी 2018

सहकारिता चुनाव : हरदोई --------------------­­--------- प्रत्याशी भाजपा विधायक , प्रस्तावक काँग्रेस जिलाध्यक्ष


एक औसत दर्जे के फिल्म अभिनेता से राजनेता बने काँग्रेस के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर अपने निहित स्वार्थो तथा अपने पाल्य ठेकेदारोँ - दलालोँ की कमाऊ गतिविधियोँ के चलते उत्तर प्रदेश मेँ काँग्रेस की जडोँ मेँ मट्ठा डालने के कार्य मेँ पूरे मनोयोग से लगे हैँ , ऎसा लगता है । हालिया दिनोँ की कुछ घटनाएँ इसकी गवाही दे रही हैँ जिसमेँ निकाय चुनाव मेँ लेनदेन के झगडे के बाद प्रदेश अध्यक्ष द्वारा तत्कालीन जिलाध्यक्ष को हटाकर मनोनीत किए गए नये जिलाध्यक्ष आशीष कुमार सिँह ने नैतिकता की सारी हदेँ लाँघते हुए सहकारी बैँक के चुनाव मेँ भाजपा समर्थित प्रत्याशी व भाजपा के विधायक आशीष सिँह आशू का प्रस्तावक बनकर यह साबित कर दिया कि काँग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को ऎसे लोग ही ज्यादा पसन्द आते हैँ जो उनके कमाऊ और ठेकेदार करीबी लोगोँ की पसन्द होते हैँ ।
निकाय चुनावोँ भेँ टिकट के लिए लेनदेन के मामले मेँ विवाद और हरदोई के टिकटार्थियोँ और कार्यकर्ताओँ के साथ प्रदेश अध्यक्ष की कमाऊ टोली के साथ हुई मारपीट के बाद हरदोई के तत्कालीन जिलाध्यक्ष राजीव सिंह को आनन फानन मेँ पदमुक्त कर नया जिलाध्यक्ष बनाया गया था । सूत्र बताते हैँ कि नये जिलाध्यक्ष के नाम की सँस्तुति उस शख्स ने की थी जो प्रदेश अध्यक्ष को लखनऊ मेँ आवास उपलब्ध कराकर प्रदेश पदाधिकारी बना है । उसकी बात टालना प्रदेश अध्यक्ष के लिए सम्भव नहीँ था लेकिन उस सिफारिशी जिलाध्यक्ष ने सहकारी बैँक चुनाव मेँ भाजपा विधायक का प्रस्तावक बनकर यह साबित कर दिया कि ठेकेदारोँ और दलालोँ द्वाया प्रदेश अध्यक्ष को घेरे मेँ लेकर चलाई जा रही प्रदेश काँग्रेस मेँ राजनीतिक नैतिकता की अर्थी उठाया जाना अब आम बात होगी जनता पर इसका कोई असर पडे ।
खैर यह खबर आम होने के बाद प्रदेश काँग्रेस की और से लीपापोती की कवायद शुरू कर दी गयी है । जिसके तहत् उत्तर प्रदेश काँग्रेस कमेटी की अनुशासन समिति की और से पूर्व विधायक फजले मसूद ने हरदोई के मौजूदा भाजपा प्रेमी जिलाध्यक्ष को दो फरवरी को कारण बताओ नोटिस जारी किया है । अब देखना यह है कि यह जिलाध्यक्ष प्रदेश अध्यक्ष की ठेकेदार टोली से फिर से साध कर कार्रवाई से बच पाता है या इसके खिलाफ सच मेँ कार्रवाई की जाती है ।
भूपेन्दर पाल सिंह 

सोमवार, 29 जनवरी 2018

ऎसी समीक्षा बैठकोँ से सँतुष्ट नहीँ हैँ काँग्रेस का एक धडा

लखनऊ , 29 जनवरी / उत्तर प्रदेश मेँ काँग्रेस के असँतुष्ट धडे को एक कामयाबी तो मिली जब उसके दबाव मेँ पश्चिम उत्तर प्रदेश मेँ मँडल स्तर पर बुलाई गयी एक सामान्य बैठक को नगर निकाय चुनाव की समीक्षा बैठक मेँ बदल दिया गया । यह बैठक कल गाजियाबाद मेँ प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर की मौजूदगी मेँ सम्पन्न हुई ।
प्रदेश काँग्रेस अध्यक्ष के कार्यकलापोँ से असन्तुष्ट एक बडा खेमा नगर निकाय चुनावोँ मेँ काँग्रेस के बेहद खराब प्रदर्शन को लेकर समीक्षा बैठक बुलाए जाने की माँग कर रहा था ।
कल की कथित समीक्षा बैठक से असन्तुष्टोँ के लिए एक राहल भरी खबर यह भी आई कि इस बैठक मेँ ठेकेदारोँ और दलालोँ की जिस चौकडी से प्रदेश अध्यक्ष घिरे हुए हैँ उस चौकडी का कोई सदस्य मँच पर प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर के अगल बगल मँच पर बैठा नहीँ दिखाई दिया । असँतुष्टोँ का कहना है कि जिला व शहर अध्यक्षोँ की बैठक मेँ इसी चौकडी को अपने अगल बगल बैठाने के बाद से ही राजबब्बर की कार्यशैली पर उँगलियाँ उठना शुरू हुई थीँ और उस बैठक की मँच की तस्वीरेँ सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीँ । लेकिन साथ ही असँतुष्टोँ का यह भी कहना है कि एक बैठक मेँ उस चौकडी को मँच से दूर रखने का मतलब यह नहीँ है कि प्रदेश अध्यक्ष ने उस चौकडी से किनाराकशी की है , हकीकत यह है कि वह चौकडी अभी भी महत्वपूर्ण पदोँ पर कब्जा जमाए बैठी है और प्रदेश अध्यक्ष अपने सामान्य कामकाज के लिए भी उनके ऊपर आश्रित दिखाई देते हैँ ।
असँतुष्टोँ का यह भी कहना है कि समीक्षा बैठक मेँ सिर्फ चुनाव लडने वालोँ को ही नहीँ हर सीट पर टिकट के उन मजबूत दावेदारोँ को भी बुलाया जाना चाहिए जिनकी मजबूत दावेदारी के बावजूद उन्हेँ टिकट ना देकर टिकट किसी दूसरे दावेदार को दे दिया गया है । उनके अनुसार समीक्षा मेँ इस बात को भी शामिल किया जाना चाहिए कि लगभग सत्रह सीटोँ पर दो लोगोँ को सिम्बल क्योँ और कैसे दे दिए गए ।
बहरहाल उत्तर प्रदेश काँग्रेस मेँ ऊपर से भले सब कुछ ठीकठाक दिखाई दे रहा हो लेकिन भीतर ही भीतर चिँगारी सुलग रही है जो कभी भी लपटोँ मेँ बदल सकती है ।-----भूपेन्दर पाल सिंह 

मंगलवार, 23 जनवरी 2018

समीक्षा बैठक से क्योँ डर रहा है काँग्रेस का प्रदेश नेतृत्व


एक और उत्तर प्रदेश काँग्रेस मेँ नगर निकाय चुनावोँ की समीक्षा बैठक बुलाए जाने की माँग जोर पकड रही है वहीँ समीक्षा बैठक बुलाने की माँग कर रहे लोगोँ को छुपे शब्दोँ मेँ निलम्बन से लेकर पार्टी से निष्कासन तक की धमकियाँ दी जाने लगी हैँ ।
अभी दो दिन पूर्व मनरेगा फ्लेगशिप प्रोग्राम के प्रभारी रहे सँजय दीक्षित ने प्रदेश अध्यक्ष को मेल भेजकर नगर निकाय चुनावोँ की समीक्षा बैठक बुलाने की माँग की और उन्होने यह जानकारी सोशल मीडिया पर भी डाल दी , खबर है कि उसी दिन शाम को दो पधाधिकारी उनके पास पहुँचे और खुद को उनका शुभचिँतक बताते हुए ऎसी माँग उठाने से मना किया हालाँकि सँजय दीक्षित समीक्षा बैठक के लिए पत्र मेल करने तक की बात तो स्वीकार करते हैँ लेकिन धमकी जैसी किसी बात से इन्कार करते हैँ । उनका यह भी कहना है कि धमकी उसे दी जाती है जो डरता हो , मुझे सच बात कहने मेँ कभी डर नहीँ लगता है इसलिए पार्टी हित मेँ मुझे जो जरूरी लगेगा उसे कहने से मैँ पीछे नहीँ हटूँगा । सूत्र बताते हैँ कि काँग्रेस के ही कुछ कद्दावर नेताओँ की पुश्तपनाही सँजय दीक्षित को हासिल है और ये वे नेता हैँ जिन्हेँ प्रदेश अध्यक्ष के फिल्मी स्टाइल मेँ वनमैन शो की तर्ज पर प्रदेश मेँ पार्टी चलाना रास नहीँ आ रहा है ।
सूत्रोँ के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर का एक टर्म पूरा हो चुका है लेकिन अभी तक वह काँग्रेस को मजबूती देने मेँ कामयाब नहीँ हो पाए हैँ यही नहीँ जिला स्तर पर भी अभी तक उन्होने कोई फेरबदल नहीँ किया है जबकि अधिकाँश जिला कमेटियाँ लगभग निष्क्रिय हैँ । यह बात पिछली 11 जनवरी को तब सामने आई जब लोकसभा चुनावोँ की तैयारी के लिए बुलाई गयी जिला/शहर अधयक्षोँ की बैठक मेँ आधे पदाधिकारी अनुपस्थित रहे और कुछ लोग मँच पर प्रदेश अध्यक्ष के साथ बैठे उनकी कोर कमेटी के एकदम जूनियर लोगोँ के चेहरे देखकर मीटिँग से बाहर चले गए ।
कुछ पार्टी पदाधिकारी समीक्षा बैठक बुलाने की माँग करने वाले सँजय दीक्षित पर यह आरोप भी लगा रहे हैँ कि इन्होने अपनी पत्नी के लिए लगनऊ से मेयर पद के टिकट के लिए दावेदारी की थी लेकिन अँतिम समय मेँ टिकट प्रेमा अवस्थी को दे दिया गया इसको लेकर उनकी नाराजगी है लेकिन सँजय दीक्षित का कहना है कि टिकट को लेकर मेरे मन मेँ कोई मलाल नहीँ है और ना ही मैँ सिर्फ लखनऊ सीट के लिए समीक्षा बैठक बुलाने की माँग कर रहा हूँ । समीक्षा बैठक मेँ तो पूरे प्रदेश के चुनावोँ मैं पार्टी की स्थिति पर चर्चा होनी चाहिए ।
सुविज्ञ सूत्रोँ के मुताबिक यदि समीक्षा बैठक बुलाने की माँग करने पर यदि सँजय दीक्षित के खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है तो कई और तलवारेँ म्यान से बाहर आ सकती हैँ ।
-----भूपेन्दर पाल सिंह 

रविवार, 21 जनवरी 2018

काँग्रेस का कमजोर ग्राउण्ड नेटवर्क सुधारने मेँ असफल रहे राजबब्बर

सांगठनिक असफलताओँ को लेकर कार्यकर्ताओँ मेँ उपजा असन्तोष

उत्तर प्रदेश के कार्यकर्ताओँ मेँ अब राज्य नेतृत्व के खिलाफ असन्तोष परिलक्षित होने लगा है , कारण यही है कि जमीनी कार्यकर्ताओँ के अभाव को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश काँग्रेस के अध्यक्ष राजबब्बर ना तो कोई कार्ययोजना ला पाए और जब कोई कार्ययोजना ही नहीँ बनी तो उस पर अमल का सवाल ही नहीँ उठता है ।
इसी कभी के नतीजतन काँग्रेस के युवराज को राजगद्दी पर सिँहारूढ होने के बाद अपने निर्वाचन क्षेत्र अमेठी मेँ बडे पैमाने पर काले झण्डोँ और मुर्दाबाद के नारोँ का सामना करना पडा । जो सूचनाएँ छन कर बाहर आ रही हैँ उनके अनुसार काँग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी अपने अध्यक्ष बनने के बाद प्रथम उत्तर प्रदेश आगमन पर अमौसी एयरपोर्ट पर बेहद कमजोर स्वागत और अपने निर्वाचन क्षेत्र मेँ विरोधियोँ द्वारा किए गए प्रदर्शन और नारेबाजी को लेकर बेहद खिन्न हैँ ।
दूसरी और काँग्रेस अध्यक्ष के आगमन पर दिखी कमजोरियोँ से पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता भी बेहद नाराज हैँ । उनका कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष ने जब समर्पित कार्यकर्ताओँ की उपेक्षा कर ऎसे लोगोँ को पदोँ से नवाजना शुरू कर दिया जिनका काँग्रेस सँगठन मेँ कभी उल्लेखनीय योगदान नहीँ रहा बस उन्होने अपनी ठेकेदारी की कमाई से प्रदेश अध्यक्ष की सुख सुविधाओँ पर पैसा खर्च किया और उसी पैसे के दम पर प्रदेश अध्यक्ष को अपने घेरे मेँ कैद कर रखा है ।
हाल ही मेँ सोशल मीडिया पर समर्पित कार्यकर्ताओँ ने यह सवाल भी उठाया है कि प्रदेश अध्यक्ष को पार्टी कार्यकर्ताओँ से इतना डरहै कि वे स्पान्सर्ड बाक्सरोँ की टोली से घिर कर पार्टी कार्यालय आते हैँ । इस पोस्ट को लेकर भी काँग्रेस मेँ चर्चाओँ का बाजार गर्म है ।
कार्यकर्ता अभी भी यह आस लगाए हैँ कि हाईकमान तक ये बातेँ पहुँचेँगी और हाईकमान जल्दी ही कोई निर्णय लेगा । लेकिन देरी होने पर कार्यकर्ताओँ का गुस्सा और बढ सकता है ।
कार्यकर्ताओँ का कहना है कि काँग्रेस ने अमेठी का जवाब बनारस मेँ अमित शाह के आगमन पर विरोध प्रदर्शन कर के देने की कोशिश ज़रूर की लेकिन ग्राउण्ड नेटवर्किँग की कमजोरी के चलते जब विरोध प्रदर्शन करने वालोँ की गिरफ्तारियाँ की गयीँ तो गिरफ्तार नेता और कार्यकर्ता मिलाकर भी एक बस भरने भर की सँख्या पूरी नहीँ कर पाए । इस जमीनी कार्यकर्ताओँ की कमजोरी के लिए भी कार्यकर्ता प्रदेश अध्यक्ष को जिम्मेदार ठहरा रहे हैँ ।

- भूपेन्दर पाल सिंह 

गुरुवार, 18 जनवरी 2018

मंगलवार, 16 जनवरी 2018

उत्तर प्रदेश मेँ कठिन होती काँग्रेस की डगर

उत्तर प्रदेश मेँ काँग्रेस की राह किसी भी तरफ से आसान होती नहीँ दिख रही बल्कि दिन-ब-दिन यह डगर और कठिन ही होती चली जा रही है । प्रदेश प्रभारी और अध्यक्ष पद से मधुसूदन मिस्त्री और निर्मल खत्री को हटाकर गुलाम नबी आजाद और राजबब्बर को लाया गया तब सोचा गया था कि काँग्रेस यहाँ मजबूत होगी लेकिन राजबब्बर की कारगुजारियोँ से काँग्रेस कार्यकर्ताओँ मेँ ही असँतोष सीमाएँ लाँघता दिखाई दे रहा है । कुछ दिनो पहले प्रदेश अध्यक्ष द्वारा प्रखर समाजवादी और पूर्व मँत्री को अपमानित कर के मीडिया प्रभारी पद से हटाया गया वह भी काँग्रेस की महिला विधायक मोना मिश्रा द्वारा अपने अधिकारोँ का मीडिया विभाग मेँ अतिक्रमण करने के बाद , तब भी यह प्रकरण सोशल मीडिया मेँ काफी चर्चित हुआ था और इस न्यूज पोर्टल ने भी वह खबर आप लोगोँ तक पहुँचायी थी ।
उसके बाद कुछ अपने आसपास कुछ अल्पज्ञात चेहरोँ का घेरा बना लेने से सँघर्षशील कार्यकर्ताओँ से उनकी दूरियाँ बढने लगीँ । उसके कुछ ही दिन बाद काँग्रेस के पुराने और चर्चित नेता स्वयँ प्रकाश गोस्वामी को जन आन्दोलन समिति से हटाकर उनके कमरे मेँ ताला डलवा दिया गया जबकि इन्होने स्वयँ ही स्वयँप्रकाश गोस्वामी को यह पद सौँपा था । इतने पर ही राजबब्बर नहीँ रुके , उन्होने काँग्रेस के पुराने नेताओँ के पर कतरने शुरू किए । जिनके पर कतरे गए उनमेँ पूर्व मँत्री रामकृष्ण द्विवेदी से लेकर हनुमान त्रिपाठी तक के नाम शामिल हैँ ।
काँग्रेस जनोँ को एक झटका तब भी लगा जब दरबारी नाम के व्यक्ति को जिसे लखनऊ के प्रशासनिक गलियारोँ मेँ आर्थिक दलाल के रूप मेँ जाना जाता है उसे लाकर कोषाध्यक्ष का पद सौँप दिया । काँग्रेसजनो को यह जोर का झटका और जोर से तब लगा जब दरबारी के यहाँ एक जन्मदिन पार्टी मेँ प्रदेश अध्यक्ष ने खुद उसके घर जाकर कोषाध्यक्ष पद पर नियुक्तिपत्र जन्मदिन के तोहफे के रूप मेँ उसे पेश किया ।
यहाँ तक भी गनीमत थी , नगर निकाय चुनावोँ मेँ मेयर से लेकर सभासदोँ तक के टिकट बेचे जाने की खबरेँ सामने आने से राजबब्बर की ठेकेदार चौकडी एक बार फिर चर्चा मेँ आई । इस मामले मेँ तो काँग्रेस कार्यालय मेँ जूतमपैजार तक हुई और दूर तक इस घटना की गूँज सुनाई दी ।
कल फिर काँग्रेस की पतनशीलता लोगोँ को दिखाई दी जब पार्टी के नव निर्वाचित अध्यक्ष राहुल गाँधी पार्टी की कमान सँभालने के बाद पहली बार लखनऊ होकर अपने निर्वाचन क्षेत्र अमेठी गए लेकिन लखनऊ के अमौसी हवाई अड्डे पर उनके स्वागत मेँ कुलजमा दो सौ कार्यकर्ता ही इकट्ठा हो पाए उनमेँ से भी पचास से ज्यादा लोग और गाडियाँ उन्नाव की पूर्व साँसद अनु टँडन लेकर आई थीँ ।
इस सँवाददाता ने इतनी कम भीड का कारण जानने के लिए कुछ प्रतिबद्ध कार्यकर्ताओँ से बात की तो उनका साफ़ कहना था कि जब चँद ठेकेदार और दलाल ही पद पा रहे हैँ और अध्यक्ष जी की जेब भर रहे हैँ तो भीड भी वही इकट्ठा करेँ ।
इस बढते असँतोष और प्रदेश अध्यक्ष की कार्यशैली देखते हुए तो यही लग रहा है कि उत्तर प्रदेश काँग्रेस मेँ कभी भी बगावत का विस्फोट हो सकता है ऎसे मेँ 2019 काँग्रेस के लिए प्रतिकूल परिणाम भी दे सकता है ।

- भूपेंदर पाल सिंह

शुक्रवार, 29 दिसंबर 2017

योगी सरकार की नीतियों के कारण किसान ठंडक में खेतों में सोने को मजबूर

भाकपा कार्यकर्ताओं ने सरकार की नीतियो के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन
ठंड़क भरी रात में फसलों की रखवाली करने को मजबूर हैं किसान - रणधीर सिंह सुमन
 
बाराबंकीं। प्रदेश मे योगी सरकार के आने के बाद आवारा पशुओ की संख्या उनकी नीतियो के कारण बढ़ गई है। जिससे खेती किसानो करने वाले लोग अपनी फसलो को बचाने के लिये ठड़क भरी रातो में खेत की रखवाली करने को मजबूर है। उसके भी बावजूद लगभग 50 प्रतिशत फसले आवारा पशुओ द्वारा नष्ट की जा चुकी है। योगी इस विकराल समस्या का समाधान करने मे असमर्थ है। प्रदेश मे पूर्व की सरकारों ने ग्रामीण क्षेत्रो मे सबको बिजली मिले इसके लिये विद्युत दरो को कम करके रखा था। लेकिन वर्तमान सरकार ने अत्याधिक बिजली दामो को बढ़ा दिया है। जिससे गरीब आदमियो को विद्युत कनेक्शन जारी रखना दुर्भर हो गया है। उक्त बातें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी सहसचिव रणधीर सिंह सुमन ने विरोध प्रदर्शन करने के पश्चात् जिलाधिकारी कार्यालय पर व्यक्त किये। पार्टी के जिला सचिव बृजमोहन वर्मा ने कहा कि धर्म के आधार पर जनता को लड़ाने के अतिरिक्त इस केन्द्र व प्रदेश की सरकार के पास कोई एजेन्ड़ा नही है। तो वही पार्टी सह सचिव डा0 कौसर हुसैन ने कहा कि मॉब-लीचिंग के कारण अल्पसंख्यको का जीवन मुश्किल है। अराजकता का दौर जारी है। अराजकतत्वो द्वारा लोगो की पीट-पीटकर मारने की घटनांए बड़ी है। किसान सभा जिलाध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि आलू जैसी नकदी फसलो के दाम नही मिल पा रहे है। धान खरीद की व्यवस्था इनके करीबी सिर्फ झूठ बोलने के अतिरिक्त कोई कार्य नही है। प्रदर्शनकारियों मे दलसिंगार, अमर सिंह, रामनरेश वर्मा, गिरीश चन्द्र, प्रवीन कुमार, मुकेश, गणेश सिंह अनूप, नीरज वर्मा, अवधेश यादव, वीरेन्द्र कुमार, प्रमोद वर्मा, नरेन्द्र यादव, पूर्णश प्रताप सिंह, राजेश सिंह, सुरेश यादव मौजूद रहे।

 - भूपिंदर पाल सिंह "शैंकी"

बुधवार, 13 दिसंबर 2017

लोकसंघर्ष पत्रिका दिसम्बर 2017 --अदनान कफील 'दरवेश "


लोकसंघर्ष पत्रिका दिसम्बर 2017 --शेर अली अफरीदी


लोकसंघर्ष पत्रिका दिसम्बर 2017 --कन्हैया कुमार


लोकसंघर्ष पत्रिका दिसम्बर 2017 --गिरीश पंकज का आलेख ---साहिर